gumanji patel
सिनली
मंगलवार, 24 मार्च 2015
शब्द-शब्द में पीर है
शब्द-शब्द में पीर है, शब्द-शब्द में धीर। शब्द बनें संजीवनी, शब्द दहकते तीर। दुनिया का यह चलन है, जिसमें जितनी धार। उसको उतने क्षेत्र का, माने मंसबदार।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें