"अक्सर सुना जाता है कि अब दुनिया बदल गई है.. . परन्तु जरा सोचिये..
*➖"मिर्ची ने अपनी तिखाश नहीं बदली,*
*➖आम ने अपनी मिठास नहीं बदली,*
*➖पत्तों ने अपना हरा रंग नहीं बदला,*
*➖चिडियों ने चहकना नहीं छोडा,*
*➖फूलों ने महकना नहीं छोडा। "*
ईश्वर ने अपनी दयालुता हमेशा दी ..*
प्रकृति ने अपनी कोमलता नहीं बदली...*
*बदलीं हैं तो इंसान ने अपनी इंसानियत ,*
और दोष देता हैं पूरी दुनिया को...
दुनिया सतयुग में भी ऐसी ही थी,*
त्रेता में भी, द्धापर में भी, और कलयुग में भी।*
बदला है तो सिर्फ इन्सान बदला,*
👌या इन्सान की सोच बदली है।.
Behad sundar ......,
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