राम राम सा
मित्रो वोट देकर एक अच्छे प्रत्याक्षी को चुनना एक मतदाता का कर्तव्य और अधिकार है। लेकिन हम मतदाता प्यार का प्रयोग करते हुए खर्चा करने वाले सरपंच की खोज करते हैं। मानो सरपंच विकास नही सिर्फ एक महीना दारु डोडा खाना खिलाए वो ही अच्छा सरपंच होता है ।
इसलिए जीता हुआ सरपंच अपने गले में जनता की विजय माला ना देखकर , वोटबैंक की पहनायी हुई खर्च की माला ही पाता है और पूरे पांच साल तक उनका किया हुआ खर्च के जुगाड़ मे लग जाता है।
वह जानता है कि सरपंच चुनाव वह अपने गुणों के कारण नहीं ब्लकि मतदाताओं की मूर्खता से जीता हुआ है। इसलिये मतदाताओ से अपील है कि योग्य उम्मीदवार चुने जो गाँव से जुड़ा हुआ हो । बाहरी व्यक्ति वोट के बदले खर्चे का लालस दे तो उनके झांसे मे ना आये
मतदाता सरपंच के खर्चे को ना देखकर कर्तव्यनिष्ठ और समझदार सरपंच को ही चुने, ना कि अयोग्य व खर्चा करने वाले को।
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