रविवार, 4 नवंबर 2018

जमाना ले बैठ्या

सुप्रभातम्.
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जमाना ले बैठ्या....
ढोलां रा मकाना न,आरसीसी ले बैठी;
रोहिड़ा र किवाड़ा न,शिशम ले बैठी;
धोती हारा मोट्यारां न,जिन्स पेंट ले बैठी;
चरभर हारा खेलां न,तीन-पत्ती ले बैठी;
आटा हारा गुलगुलां न,बैसन हारी कचोरी ले बैठी;
पढन हारा छोरां न,वाट्सएप हारी चैटिंग ले बैठी;
ईस हारा मांचा न,डबल बेड ले बैठी;
ऊँट गाडा री सवारी न,हीरो होंडा ले बैठी;
काचरां र साग न,मिरच्यां ले बैठी;
टाबरां री सेहत न,होर्लेक्स री बोतल ले बैठी;
पटा हारा जांघियां न,रूपा बोक्सर ले बैठी;
मुर्गा छाप पटाखां न,एक सौ बीस साउन्ड री डब्बी
ले बैठी;
प्याजिया वाली  बुज्जी न,नेस्ले मैगी ले बैठी;
गांव आला  घिन्दड़ न,बिकाऊ क्रिकेट ले बैठी;
गांव आला छोरां न,बाणीयां री छोरीयां ले बैठी;
सिनली हारी मारवाड़ी ने,वाट्सएप वाली अंग्रेजी ले बैठी,
ज्यान हुं प्यारा भाया ने , लुगायां ले बैठी ||

आन्जणा समाज की उत्पत्ति

        ।।राम राम सा।।

आंजना की उत्पति
"आंजी नाखे ते आंजना" कहावत को सार्थक
करना और गोरोवान, मजबूत बांधो,
तेजस्वी आँखे और खड़ताल काया धराते
आंजना ऐ अत्यंत
बुद्धिशाली स्वाभिमानी और मेहनत होते
है | कृषि और पशु पालन के साथ बंधा हुआ ये
समाज गुजरात में पचास से जितने गोल में
फेला हुआ है | जिसमे बार, बावीसी,
साडी सताविसी, वादीयार, जेतोड़ा,
चोथिया, उमरान धान्धार तेर झला, इडर
बेतालिसी मोडासिया,
मालपुरिया दक्षिण में नवगाम, कामरेज
वगेरह का समावेश होता है |
आंजना में पटेल, चौधरी, देसाई
जाती प्रचलित है| आंजना की कुल २३२
सखा हैं| जिसमे अटीस ओड, आकोलिया,
फेड़, फुवा, फांदजी, खरसान, भुतादिया,
वजागांड, वागडा, फरेन, जेगोडा, मुंजी,
गौज, जुआ लोह, इटार, धुजिया, केरोट,
रातडा, भटौज, वगेरह समाविष्ट हैं|
भारत मैं मुख्यत राजस्थान, मध्यप्रदेश,
गुजरात, हरियाणा, कच्छ और महारास्ट्र मैं
आंजना जाती रहती हैं|
आंजना समाज के अलग-अलग गोल के अभ्यास
पर से मालूम पड़ता है कि आंजना स्वभाव में
खुद उदार दिल कि होती है|
उनका बुलाना, रोटी और
ओटला अद्फेरा होता है| वो अन्याय सहन
नहीं कर सकते, अन्याय होते देख
उनकी आत्मा जाग उठती हैं और न्याय के
लिए चाहे जितने कठोर निर्णय लेते हुए
भी वो हिचकिचाते नहीं है|
आंजनाओ कि परम्परागत परिवेश में पुरुष
झम्भा, पहेरण और धोती पहेनते हैं| सीर पर
सफ़ेद पघड्डी बांधते हैं|
जबकि स्त्रीया अलग-अलग कलर
कि साडी, ब्लाउज डागली और घेरवाले
काले व लाल पेटीकोट पहनती है |
हिन्दू शास्त्र के मुजब एक ही कुल में और
पितापक्ष के छः पीडी के रिश्ते में
तथा मातृपक्ष के पॉँच पीडी के रिश्ते में
शादी व्यवहार नहीं करते|
भव्य बादशाही भूतकाल
धरानी आंजना जातीका इतिहास
गौरान्वित हैं| आंजना कि उत्पति के बारे में
विविध मंतव्य/दंत्तकथाये प्रचलित हैं| जैसे
भाट चारण के चोपडे में आंजनाओ के
उत्पति के साथ सह्स्त्राजुन के आठ
पुत्रो कि बात जोड़ ली है परशुराम शत्रुओं
का संहार करने निकले तब सहस्त्रार्जुन के
पास गए | युद्घ में सहस्त्रार्जुन और उनके ९२
पुत्रो की मृत्यु हो गयी | आठ पुत्र
युध्भूमि छोड के आबू पर माँ अर्बुदा की शरण
में आये | अर्बुदा देवी ने उनको रक्षण दिया |
भविष्य मैं वो कभी सशत्र धारण न करे उस
शर्त पर परशुराम ने उनको जीवनदान दिया |
उन आठ पुत्रो मैं से दो राजस्थान गए |
उन्होंने भरतपुर मैं राज्य
की इस्थापना की उनके वंसज जाट से
पहचाने गए | बाकि के छह पुत्र आबू मैं ही रह
गए वो पाहता अंजन के जैसे और उसके बाद मैं
उस शब्द का अप्ब्रंश होते अंजना नाम से
पहचाने गए |
सोलंकी राजा भीमदेव पहले
की पुत्री अंजनाबाई ने आबू पर्वत पर
अन्जनगढ़ बसाया और वहां रहनेवाले
अंजना कहलाये |
मुंबई मैं गेझेट के भाग १२ मैं बताये मुजब इ. स.
९५३ मैं भीनमाल मैं परदेशियों का आक्रमण
हुआ, तब कितने ही गुजर भीनमाल छोड़कर
अन्यत्र गए | उस वक्त् अंजना पतीदारो के
लगभग २००० परिवार गाडे में भीनमाल
का निकल के आबू पर्वत की तलेटी मैं आये हुए
चम्पावती नगरी मैं आकर रहने लगे | वहां से
धाधार मे आकर स्थापित हुए, अंत मे
बनासकांठा , साबरकांठा , मेहसाना और
गांधीनगर जिले मे विस्तृत हुए |
सिद्धराज जयसिंह इए .स . 1335-36 मैं
मालवा के राजा यशोवर्मा को हराकर
कैद करके पटना में लकडी के पिंजरे मे बंद करके
गुमया था | मालवा के दंडनायक तरीके
दाहक के पुत्र महादेव को वहिवाट सोंप
दिया तब उत्तर गुजरात मे से बहुत से
आंजना परिवार मालवा के उज्जैन प्रदेश के
आस -पास स्थाई हुए है | वो पाटन आस -
पास की मोर ,आकोलिया , वगदा ,
वजगंथ , जैसी इज्जत से जाने जाते हैं |
अंजना समाज का इतिहास
राजा महाराजो की जैसे लिखित नहीं हैं |
धरती और माटी के साथ जुडी हुई इस
जाती के बारे मैं कोई सिलालेखो मे बोध
नहीं है | खुद के उज्जवल भविष्य के लिए श्रेष्ठ
मार्गदर्शन मनुष्य को इतिहास
द्वारा ही प्राप्त होता है | वहिवांचा के
चोपडे , जयति भुख्पतर , लोक साहित्य ,
जाती के लगन गीतों मे से
आधा अधुरा इतिहास साथ मे आता है |
पहले के समय मैं उत्तर गुजरात "आनंद " के नाम से
जाना जाता था | इस परदेश को गुजर
अजन्य के "अंजना " नाम से जाने जाते थे इस
परदेश मैं रहते आन्जनाओ के नाम आनंद के ऊपर से
उतर आया ऐसा लगता हैं |
गुजरात के रजा भीमदेव के राजपूत सैनिको ने
आबू पर्वत पर "अंजना गढ़ " नाम का जन पद
स्थायी किया जिसके रहवासी "अंजना"
कहलाये |
गौताम्रिशी की पुत्री और महादेव
की पत्नी "अंजनी " के वंशज होने से "अंजना "
कहलाये |
एक दंतकथा के अनुसार " आन्जनागिरी "
पर्वत के उनके भूल रहे थान के जग्य पर से
अंजना नाम पड़ा हुआ है ऐसा लगता है |
"अंजना" सहस्त्रार्जुन के वंशज है |
जाट और आंजनाओ के पूर्वज समान थे| वैसे
ही पहले के ब्राह्मिन और क्षत्रियो के बिच
में शादी का व्यव्हार था|

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

दर्द की असली वजह

राम राम सा

🤓✍✍✍✍✍✍✍
🤠🤠🤠🤠🤠🤠🤠🤠
*दर्द की असली वजह यही है !*

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*आधार लिंक कराने से महाराष्ट्र में 10 लाख गरीब गायब हो गए!*

*उत्तरखण्ड में भी कई लाख फ़र्ज़ी बीपीएल कार्ड धारी गरीब ख़त्म हो गए !*

*तीन करोड़ (30000000 ) से जायदा फ़र्ज़ी एलपीजी कनेक्शन धारक ख़त्म हो गए !*

*मदरसों से वज़ीफ़ा पाने वाले 1,95,000 फर्ज़ी बच्चे गायब हो गए!*

*डेढ़ करोड़ (15000000 ) से ऊपर फ़र्ज़ी राशन कार्ड धारी गायब हो गए!*

*ये सब क्यों और कहाँ गायब होते जा रहे हैं !*

*चोरो का सारा काला चिटठा खुलने वाला है …*
*इसीलिए,*
*सारे चोर मिलकर,*
*माननीय सर्वोच्च न्यायलय में याचिका दायर कर दिया कि,*

*आधार लिंक हमारे मौलिक अधिकारों का हनन है !⁉⁉*

*चोरों  को प्राइवेसी का कैसा अधिकार⁉*

*वंदे मातरम,*

*#कौन_कौन_है_मोदी_जी_के_खिलाफ!!!!!!!*

*1)कंपनी के MD :मोदी ने फर्जी 3 लाख से ज्यादा कम्पनियां  बन्द कर दी है!*

*2) राशऩ डीलर नाराज़ हो गये!*

*3) Property Dealer नाराज़ हो गये!*

*4)ऑनलाइन सिस्टम बनने से दलाल नाराज़ हो गये है!*

*5) 40,000 फर्जी NGO बन्द हो गये है, इसलिए इन  NGO के मालिक भी नाराज़ हो गये !*

*6) No 2 की Income से Proprty खरीद ने वाले नाराज़ हो गये!*

*7) E-Tender  होने से कुछ ठेकेदार भी नाराज़ हो गये!*

*8) गैस कंपनी वाले नाराज़ हो गये!*

*9) अब तक 12 करोड लोगो को Income टैक्स के दायरे मै आ चुके लोग नाराज़ हो गये!*

*10) GST सिस्टम लागू होने से ब्यापारी लोग नाराज़ हो गये, क्योकि वो लोग Automatic सिस्टम मै आ गये है!*

*11) वो 2 नम्बर  के काम बाले लोग फलना फूलना बन्द हो गये है!*

*13) Black को White करने का सिस्टम एक दम से लुंज सा हो गया है।*

*14) आलसी सरकरी अधिकारी नाराज हो गये,*
*क्योकि समय पर जाकर काम करना पड रहा हैं!*

*15) वो लोग नाराज हो गये, जो समय पर काम नही करते थे और रिश्वत देकर काम करने मे विश्वास करते है।*

*दुख होना लाजिमी है देश वदलाव की कहानी लिख रहा है, जिसे समझ आ रही है बदल रहा है जिसे नही आ रही है वो मंदबुध्दि युवराज का मानसिक गुलाम हमे अंध भक्त कह कह कर छाती कूट रहा है!!*
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फेसबुक ज्योतिषी


राम राम सा

Facebook ज्योतिष
१. जिसकी डीपी स्थिर रहती है उसका स्वभाव शांत रहता है.😌😊
२. बार-बार डीपी बदलने वाले चंचल स्वभाव के होते है.🤗🙋
३. छोटे स्टेटस रखने वाले संतोषी प्रवृत्ती होते हैं.😇
४. हमेशा स्टेटस बदलने वाले शौकीन होते हैैं.🤠
५.सतत कुछ न कुछ शेअर करने वाले दिलदार मन के होते हैं.😍
६.कभी भी किसी को लाईक न करने वाले घमंडी होते हैं.😤
७. प्रत्येक पोस्ट पर दिल से प्रतिक्रिया देने वाले रसिक और दुसरो की भावनाओं का आदर करने वाले होते हैं.
८. इधर के मेसेज उधर फेंकने वाले राजनितीक प्रवृत्ति के होते हैं.😎
९. फोटो या पोस्ट देखते ही ओपन करने वाले अधीर स्वभाव के होते हैं.😃
१०. पुरानी पोस्ट बार बार चिपकाने वाले उद्दंड होते हैं.🤓
११. दुसरे की पोस्ट को पीछे कर स्वतः की पोस्ट आगे ढकलने में माहिर व्यक्ती खुद के बोलबाले करने वाले होते हैं. 😎
१२. मेसेज पढ़कर भी प्रतिक्रिया न देने वाले संकुचित प्रवृत्ती के होते हैं.😒
१३. कभी भी कुछ भी शेअर न करने वाले कंजूस होते हैं.😐
१४. बड़े मेसेज ना पढ़ने वाले आलसी या अति व्यस्त होते हैं.😪
१५. अलग अलग facebook ग्रुप बनाने वाले अति महत्वाकांक्षी होते हैं.😁
१६. काम तक सीमित facebook चालू रखने वाले जीवन में यशस्वी होते हैं.🤑
- देखिये ....आप कहाँ फिट होते हैं 😜

जय जय राजस्थान

राम राम जी

बता राजस्थान "बाँ " थारी रीत कठै।
सीस कटियोड़ा धड़ लड़ रहया एड़ा पूत कठै।
गायां खातर गाँव गाँव मे बलिदानी जुंझार कठै।
फेरां सूं अधबीच मे उठतों "बो" पाबू राठौड़ कठै ।
कठै है अब "बा" भामाशाह साहूकार री रीत।
सुख दुख मे सब सागै रेवता बा मिनखा री प्रीत कठै।
मोठ बाजरा रो रोट ओर फोफलिया रो साग कठै।
मारवाड़ सू मेवाड़ तक गूंजता "बी" मीरां रा गीत कठै।
बता राजस्थान "बाँ " थारी रीत कठै।
गोगा- रामदेव तेजा जेड़ा कलजुग रा पीर कठै।
भोम-धरा पर आंच आवता मर मिटनै री रीत कठै।
दुर्गा- पन्ना जेड़ी स्वामिभक्ति री रीत कठै।
बता राणी पद्मणी जेड़ी प्रीत कठ
कठै है बो "प्रथ्वी" गोरी ने हरबा वालो ।
पतिया साग सुरग मे जावण री रीत कठै।
बता "बाँ "मूमल महेन्द्रा ओर ढोला- मारू री प्रीत कठै।
बता राजस्थान "बाँ " थारी रीत कठै

राजस्थानी कविता

राम राम सा

😩 *'फोड़ा घणा घाले'*😤

घटिया पाड़ोस,
बात बात में जोश,
कु ठोड़ दुखणियो,
जबान सुं फुरणियो.... *फोड़ा घणा घाले।*

थोथी हथाई,
पाप री कमाई,
उळझोड़ो सूत,
माथे चढ़ायोड़ो पूत.... *फोड़ा घणा घाले।*

झूठी शान,
अधुरो ज्ञान,
घर मे कांश,
मिरच्यां री धांस.... *फोड़ा घणा घाले।*

बिगड़ोडो ऊंट,
भीज्योड़ो ठूंठ,
हिडकियो कुत्तो,
पग मे काठो जुत्तो.... *फोड़ा घणा घाले।*

दारू री लत,
टपकती छत,
उँधाले री रात,
बिना रुत री बरसात.... *फोड़ा घणा घाले।*

कुलखणी लुगाई,
रुळपट जँवाई,
चरित्र माथे दाग,
चिणपणियो सुहाग.... *फोड़ा घणा घाले।*

चेहरे पर दाद,
जीभ रो स्वाद,
दम री बीमारी,
दो नावाँ री सवारी.... *फोड़ा घणा घाले।*

अणजाण्यो संबन्ध,
मुँह री दुर्गन्ध,
पुराणों जुकाम,
पैसा वाळा ने 'नाम'.... *फोड़ा घणा घाले।*

ओछी सोच,
पग री मोच,
कोढ़ मे खाज,
मूरखां रो राज.... *फोड़ा घणा घाले।*

कम पूंजी रो व्यापार,
घणी देयोड़ी उधार,
बिना विचार्यो काम .... *फोड़ा घणा घाले !*
आछौ लाग्यो तो आगे भेज
            🙏🙏

नीत बदल मन मैला होग्या


राम राम सा

रंग बदळ किरकांटया होग्या, नीत बदल मन मेला होग्या,
मिनखीचारो मरतो दीखे, पईसां लारे गेला होग्या।
घर सुं भाग गुरुजी बणग्या, चोर उचक्का चेला होग्या,
चंदो खार कार में घुमे, भगत मोकळा भेळा होग्या।
कम्प्यूटर को आयो जमानो, पढ़ लिख ढ़ोलीघोड़ा होग्या,
पढ़ी-लिखी लुगायां ल्याया काम करण रा फोड़ा होग्या।
जवानी में बूढ़ा होग्या सांस फूलगी घायल होग्या,
घर-घर गाड़ी-घोड़ा होग्या, जेब-जेब मोबाईल होग्या।
छोरयां तो हूंती आई पण आज पराया छोरा होग्या,
राल्यां तो उघड़बा लागी, न्यारा-न्यारा डोरा होग्या।
इतिहासां में गयो घूंघटो, पोडर पुतिया मूंडा होग्या,
झरोखां री जाल्यां टूटी, म्हेल पुराणां टूंढ़ा होग्या।
भारी-भारी बस्ता होग्या, टाबर टींगर हळका होग्या,
मोठ बाजरी ने कुछ पूछे, पतळा-पतळा फलका होग्या।
रूंख भाडकर ठूंठ लेयग्या जंगळ सब मैदान होयग्या,
नाडी नदियां री छाती पर बंगला आलीशान होयग्या।
मायड़भाषा ने भूल गया, अंगरेजी का दास होयग्या,
टांग कका की आवे कोनी ऐमे बी.ए. पास होयग्या।
सत संगत व्यापार होयग्यो, बिकाऊ भगवान होयग्या,
भगवा भेष ब्याज रो धंधो, धरम बेच धनवान होयग्या।
ओल्ड बोल्ड मां बाप होयग्या, सासु सुसरा चौखा होग्या,
सेवा रा सपनां देख्या पण आंख खुली तो धोखा होग्या।
बिना मूँछ रा मरद होयग्या, लुगायां रा राज होयग्या,
दूध बेचकर दारू ल्यावे, बरबादी रा साज होयग्या।
तीजे दिन तलाक होयग्यों, लाडो लाडी न्यारा होग्या,
कांकण डोरां खुलियां पेली परण्या बींद कंवारा होग्या।
बिना रूत रा बेंगण होग्या, सियाळा में आम्बा होग्या,
इंजेक्शन सूं गोळ टमाटर फूल-फूल कर लाम्बा होग्या।
कविता म्हारी फिरे कंवारी तुकबंदी का फेरा होग्या,
दिवलो करे उजास जगत में खुद रे तळे अंधेरा होग्या।
मन मरजी रा भाव होयग्या, पंसेरी रा पाव होयग्या,
महंगाई री मार तिवाड़ी, जीणां दोरा आज होयग्या।