सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

अच्छी सोच

         

   राम राम सा
मित्रों इस फोटो मे सारी प्लेटे उल्टी है लेकिन कुछेक सीधी भी है
जैसे ही आपको सीधी प्लेट नजर आएगी वैसे ही सब कि सब प्लेटे
सीधी हो जाएंगी ।
जिन्दगी मे भी इस तरह ही होता है जब हमारी सोच उल्टी होने
लगती है तब हमे सब चीजे उल्टी लगने लगती है । इसलिये हमेशा
मन मे अच्छी सोच रखे और जीवन सफल बनाये।
गुमनाराम चौधरी 

राजनीति के दोहे

नेता चालीसा

दोहा
जय नेतागण राजनीति के,
तुमको करूं प्रणाम।
तुम्हीं विधाता अन्यायी के, 
करो चापलूसों का काम। 

चौपाई
जय राजनीति के नेतागण,
तुम मोहे हो सब के मन।
सब चमचों की करो भलाई 
वे चाहे जितनी करे ढिठाई।
उनको आंच न आने पाए, 
तुम्हरी कुर्सी भले ही जाए।
अवगुणकारी के तुम धागे हो।
घपला-झगड़ा तुम करवाते,
सही जगह पर उधम मचाते।
राजनीति के तुम बड़े पुजारी, 
अपने दोषी की करो रखवाली।
जुल्म कराने में माहिर हो,
चोर-उचक्कों में शामिल हो।
धन्य-धन्य भारत के वीर 
भोली जनता पर मारो तीर।
क्या कुर्सी का खेल निराला,
हरदम ओढ़े रहो दुशाला।
लालच की तुमको भूख लगी है, 
बेईमानी की पीर जगी है
कब तक ऐसे चलेगा काम, 
एक दिन होगा सत्यानाश।
हाथ जोड़ तब नहीं बचोगे, 
सब देखेंगे जल्द पिसोगे। 

दोहा

भगवन् ऐसी बयार चला दो 
अत्याचार हो जाए कम। 
राजनीति के बेईमानों का 
फिर भारत में हो न जन्म।

रविवार, 7 अक्टूबर 2018

कडवा चौथ

एक समय की बात है,
लक्ष्मी जी का वाहन उल्लू उनसे रूठ गया और बोला,
आपकी सब पूजा करते है, मुझे कोई नही पूछता,
लक्ष्मी जी बोली, नाराज़ मत हो, अब से हर साल दिवाली पर
मेरी पूजा से कुछ दिन पहले तुम्हारी पूजा होगी,
उस दिन सब उल्लू पूजे जायेंगे,
और वो दिन"करवाचौथ"के नाम से जाना जाएगा...
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सार:
इस कथा का सार मेने ये निकाला है की…….
" पति उल्लू नहीं होते, उल्लू ही पति बनते है.....!!!
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वैसे ताज़ा शोध से ये भी पता चला है के अगर पत्नी
करवाचौथ की जगह मौन व्रत रख ले तो पति 25 साल
तक ज़्यादा ज़िंदा रह सकता है """""""""""""
करवा चौथ------नारी मन की बात !
प्रेम से परिपूर्ण सुखद एहसास
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करवा-चौथ
का व्रत रखते वक्त
पत्नी के मन में एक सुखद एहसास रहता है कि मैंने मेरे पति के लिए व्रत रखा है और पति को मानसिक समाधान मिलता है कि कोई है जिसे उसकी इतनी फ़िक्र है। इस त्यौहार के बहाने ही सही दोनों के मन में यह जो प्रेम से परिपुर्ण सुखद एहसास आता है वो अनमोल है। हाल ही में  व्हाट्स एप्प पर एक कविता पढ़ने को मिली, कि हम भारतीय महिलायें करवा-चौथ क्यों करती है इसका बहुत ही अच्छे से वर्णन किया गया है। 

करवाचौथ तो बहाना है,
असली मकसद तो पति को याद दिलाना है...
कि कोई है,
जो उसके इंतजार में दरवाजे पर

टकटकी लगाए रहती है,
पति के इंतज़ार में.
सदा आँखें बिछाए रहती है...
वैलेंटाईन ड़े, रोज़ ड़े

इन सब को हम समझ नहीं पाती है....
प्यार करती है दिल की गहराईयों से,
पर कह नहीं पाती है....
सुबह से भूखी है,

हमारा गला भी सूख जाता है....
इस पर हमारा कोई ज़ोर नहीं,
हमेे प्यार जताने का
बस यही तरीका आता है....
खुलेआम किस करना हमारी संस्कृति में नहीं,

'आई लव यू' कहने में हम शर्माती है....
हम चाहती है बहुत कुछ कहना,
पर 'जल्दी घर आ जाना'
बस यही कह पाती है....

फेसबुक, ट्वीटर से मतलब नहीं हमें,
ना फोन पे वाट्सैप चलाना आता है….

यूँ तो कोई जिद नहीं करती,
पर प्यार से रूठ जाना आता है…

यूँ तो दिल मचलता होगा आपका भी,
देख कर हुस्न की बहार…

मन करता होगा कि कोई गर्लफ्रेंड बनाऔ,
पर याद आ जाता है हमारा समर्पण,
और हमारा परिवार पर लुटाया हुआ प्यार….

ऐसी हम प्रियाऔ को,
है सम्मान का, प्यार का अधिकार |।।
😍😍😍😍😍😍

चौमासा रा दिन

खेजड़ हेटै पोढस्यां,पेड्डी टांगां पाग ।
सुपणां मीठा आवसी,आथण आसी जाग ।
टीकड़ सिकसी राख मेँ, हांडी पकसी साग ।
ढाणी ठाठां लागसी, अब जागैला भाग ।
कड़बी गासी गीतड़ा, ग्वार सारसी राग ।
मुरधर मजमा लागसी, जद जागैला भाग ।
रात्यूं काढां गादड़ा,दिनड़ै डांगर ढोर।
मतीरा खावां दिनड़ै ,रात नै सिट्टा मौर ।
तिलड़ा तुरता तिड़कसी, बाजर देसी साथ ।
मोठ मरजी मानसी, जद लागांला पांथ ।

मारवाड़ी कविता

😪😪😪 बेचारो मारवाड़ी😪😪😪

'मारवाड़ी' लोगां की देखो,हालत हो रही माड़ी।
अस्त व्यस्त व्यपार हुयो,पटरी सूं उतरी गाड़ी।।
पटरी सूं उतरी गाड़ी,नही काबू मे आवे।
कमाई तो कमती हुगी,खरचो रोज बढ़ावे।।

कई साल पहला तक सगळा,आछी करी कमाई।
मारकेट मे रहता और,बासे री रोटियां खाई।।
बासे री रोटियां खाई पण,चोखी मौज मनाता।
साल में दो बार गाँव री,मुसाफ़री कर आता।।

जके दिन से गाँव सु,फैमेली अठे लाया।
उण दिन सु ही खुद रे हाथा,खुद रा पाँव कटाया।।
खुद रा पाँव कटाया,मति गई थी मारी।
लुगायाँ ने सूरत नगरी रो,चस्को लाग्यो भारी।।

बैंका सूं लेकर के लोन,अठे फ्लैट मोलाया।
कोई लिया 'भटार' मे तो,कोई  'वेसु' आया।।
कोई 'वेसु' आया बां की, किस्ता भरणी भारी।
ई मन्दी के मायने तो,अकड़ निकल गई सारी।।

अणुता पैसावाला रे,कमी नही है भाई।
प्रॉपर्टी है घरकी बे,भाड़ा सूं करे कमाई।।
भाड़ा सूं करे कमाई ,बां के फरक नही पड़ेला।
ओछी पूंजी वाळा ही,ई मन्दी में झडेला।।

घर दुकान दोनु भाड़े रा,वे सगळा सूं दोरा।
धंधो बिलकुल ठप पड्यो है,कियां होवे सोरा।।
कियां होवे सोरा या ही,चिंता फिकर लागी।
पाछा गांव जाणे री भी,अब तो मन में आगी।।

गांव चालण रो केवे जद,लुगायाँ आँख दिखावे।
करे रूप विकराल और फिर,रणचण्डी बण जावे।।
कहे कवि 'पटेल अब तो उड़ने लाग्या होश।
आप गमाया कामणा ,अब कुण ने देवा दोस ।।

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आ धरती गौरा धौरा री

राम राम सा

आ धरती गोरा धोरां री, आ धरती मीठा मोरां री
ईं धरती रो रूतबो ऊंचो, आ बात कवै कूंचो कूंचो,

आं फोगां में निपज्या हीरा, आं बांठां में नाची मीरा,
पन्ना री जामण आ सागण, आ ही प्रताप री मा भागण,

दादू रैदास कथी वाणी, पीथळ रै पाण रयो पाणी,
जौहर री जागी आग अठै, रळ मिलग्या राग विराग अठै,

तलवार उगी रण खेतां में, इतिहास मंड़योड़ा रेतां में,
बो सत रो सीरी आडावळ, बा पत री साख भरै चंबळ,

चूंडावत मांगी सैनाणी, सिर काट दे दिया क्षत्राणी,
ईं कूख जलमियो भामासा, राणा री पूरी मन आसा,

बो जोधो दुरगादास जबर, भिड़ लीन्ही दिल्ली स्यूं टक्कर,
जुग जुग में आगीवाण हुया, घर गळी गांव घमसान हुया,

पग पग पर जागी जोत अठै, मरणै स्यूं मधरी मौत अठै,
रूं रूं में छतरयां देवळ है, आ अमर जुझारां री थळ है,

हर एक खेजड़ै खेड़ा में, रोहीड़ा खींप कंकेड़ा में
मारू री गूंजी राग अठै, बलिदान हुया बेथाग अठै,

आ मायड़ संतां शूरां री, आ भोम बांकुरा वीरां री,
आ माटी मोठ मतीरां री, आ धूणी ध्यानी धीरां री,

आ साथण काचर बोरां री, आ मरवण लूआं लोरां री
आ धरती गोरा धोरां री, आ धरती मीठै मोरां री।

नवी बीनणी

मारवाङी कविता 
नवी बीनणी

कोड करे जी कोड करे
सगऴो घर लाड करे
देवर चावे म्हांसूँ बोले
पण नवी बीनणी लाज मरे

चोटी इणरी नागण है
जाणे उतरतो फागण है
बोले तो यूँ लागे ज्यूँ
बिना गत री जागण है

चूङ कङी बेङी हाँयली
नवी बीनणी पेरे कोनी
भारी भारी टोटियाँ
कानाँ में अब टेरे कोनी

डोकरी डोकरे सूँ कँवळे लारे
छाने बाताँ करे है
म्हें सुण्यो है आंपाळो बेटो
बीनणी ऊँ डरे है

कानाँ में इयरफोन लगा
फिल्मी गाणा सुणे है|
डीजे आळा गीताँ पे आ
भोपी ज्यूँ धूणे है||

बतळावे तो बोले कोनी
बोले तो बोले गाळियाँ|
सासू ने गवायो मोरीयो
चलो बजाओ ताळियाँ||

अँगूठा छाप सासू आगे
अँगरेजी री नाङ हिलावे|
आई वाई बिन बोले कोनी
इडियट गळो फाङ चिल्लावे

चैटिंग-वैटिंग आदत पङगी
आ आदत अब छूटे कोनी|
अँगरेजी आळा फलका अ
फोङियाँ बिगर फूटे कोनी|

सुसरो जद माँगे डोडा
नवी बीनणी भाँगे गोडा
डोडा बिना चाले कोनी
बुढा टाँगङा हाले कोनी

बीङी चिलम माँगे तो
कालिंदर ज्युँ लेवे डस
ऊपर सूँ अँगरेजी छाँटे
स्मोकिंग इज डेंजरस

पाङोसियाँ री लुगायाँ सँग
दिनङो बीते बाताँ मेँ|
हथायाँ री कोडावण
घर मोङी आवे राताँ में|

घर आताँ ही होवे चैकिंग
ज्यू जनधन आळा खाता मे
जै निकळे कोई कमी पेशी
ले लट्ठ ने हाथाँ मे
सासूजी रा मौर पकाया
नवी बीनणी लाताँ में

बीनणी जीमै चुपङी रोटी
सासू ने जीमावे कोरी
बिना ग्रीस हाड घूमे कोनी
कटे आ जिंदगी दोरी

राम रटण गी उमर में
मरां मरां री रट रटे
सुसरे जी री बैठक लागे
कुतो बेवे जठे

आखे घर गा जूठा ठाँव
सासू अब धो
करम तो कदी फूटा
अब किस्मत नै रो